एक तरफ बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हुआ तो दूसरी तरफ जेडीयू विधायक अनंत सिंह को बड़ा झटका लगा है. पढ़ें
पटना: मोकामा के बाहुबली जदयू विधायक अनंत सिंह को गुरुवार को पटना सिविल कोर्ट से झटका लगा है. दुलारचंद यादव हत्या मामले में दाखिल की गई उनकी जमानत याचिका एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने खारिज कर दी है.
अनंत सिंह की जमानत याचिका खारिज: कोर्ट के फैसले के बाद साफ हो गया है कि फिलहाल उन्हें जेल में ही रहना होगा. चुनाव प्रचार के दौरान हुई इस हत्या के मामले में पटना पुलिस ने अनंत सिंह को कुछ दिन पहले गिरफ्तार कर पटना स्थित बेऊर केंद्रीय कारा में भेज दिया था, जहां वे न्यायिक हिरासत में बंद हैं.
दुलारचंद हत्याकांड केस: विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान मोकामा इलाके में हुई फायरिंग में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी. घटना के बाद यादव समुदाय के लोगों ने विधायक अनंत सिंह समेत उनके समर्थकों पर हत्या की साजिश और सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगाया था. इसी आधार पर दर्ज प्राथमिकी के बाद पुलिस ने विधायक को गिरफ्तार किया.

अभी जेल में रहेंगे अनंत सिंह: हालांकि, विधायक अनंत सिंह लगातार इस पूरे मामले में खुद को निर्दोष बताते रहे हैं. उन्होंने दावा किया है कि घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाया जा रहा है. गुरुवार को पेशी के दौरान अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं.
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलील: अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अनंत सिंह का प्रभाव क्षेत्र बहुत बड़ा है. ऐसे में उनकी रिहाई से गवाहों पर दबाव पड़ सकता है और जांच प्रभावित हो सकती है. वहीं, बचाव पक्ष ने यह तर्क दिया कि विधायक को बिना पर्याप्त साक्ष्यों के मामले में जोड़ा गया है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक द्वेष का परिणाम है.
“अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी है. आदेश की प्रति मिलने के बाद अब पटना हाईकोर्ट में जमानत के लिए अपील दायर की जाएगी. उच्च न्यायालय में हमें राहत जरूर मिलेगी.”– कुमार हर्षवर्धन, अनंत सिंह के अधिवक्ता

सियासी हलचल तेज: अदालत के आदेश के बाद अनंत सिंह को फिलहाल बेऊर जेल में ही रहना होगा. राजनीतिक माहौल में पहले से ही गर्मी बनी हुई है, ऐसे में इस फैसले ने मोकामा और आसपास के क्षेत्रों में सियासी हलचल को और तेज कर दिया है. जदयू समर्थक और विरोधी दोनों ही गुट इस मामले को लेकर अपने-अपने तर्क दे रहे हैं. हत्या की इस घटना ने चुनाव माहौल में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.
अब सभी की निगाहें पटना हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां जमानत याचिका पर अगला बड़ा फैसला आने की संभावना है. हाईकोर्ट क्या रुख अपनाता है, यह आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर अहम असर डाल सकता है.







