
पटना: ”नीतीश कुमार को छेड़ा तो यह लोग पसंद नहीं करेंगे. बीजेपी को पता है कि ये जीत नीतीश कुमार की है, तुरंत आरजेडी इसे अगड़ा बनाम पिछड़ा बना देगी, नीतीश तुरंत तेवर बदल लेंगे और उनकी भाषा बदल जाएगी. ललन सिंह और संजय झा कुछ नहीं कर पाएंगे, ये एक विधायक भी नहीं तोड़ पाएगे. नीतीश कहने लगेंगे ठीक है आप सरकार बनाइए हम बाहर से समर्थन देंगे.”
पॉलिटिकल एक्सपर्ट संजय कुमार बताते हैं कि ”लालू से बातचीत शुरु हो जाएगी, इसलिए इस तरह का कोई भी रिस्क बीजेपी फिलहाल नहीं लेगी. बीजेपी को केंद्र में 12 सांसदों का समर्थन मिला हुआ है. चंद्र बाबू और नीतीश मिलकर 28 हो जाते हैं. दूसरी बात है कि 2027 में राष्ट्रपति का चुनाव है. अगर ऐसा हुआ तो ये फिर राष्ट्रपति का चुनाव प्रभावित कर देंगे. केंद्र में इनकी मदद से सरकार चल रही है. उनको (बीजेपी) बिहार में बहुत दिलचस्पी नहीं है कि बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री हो या फिर जेडीयू का, लेकिन केंद्र में उनको (बीजेपी) समर्थन से मतलब है. इसलिए बीजेपी अभी ऐसा कोई रिस्क नहीं लेगी.”

क्या बिना नीतीश के बीजेपी सरकार बनाएगी? : बीजेपी के अपना सीएम बनाने की बात इसलिए हो रही है कि क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के चाणक्य अमित शाह ने साफ तौर पर कहा था कि ”विधायक दल की बैठक में ये फैसला किया जाएगा कि अगला सीएम कौन होगा?.” हालांकि उन्होंने कई बार ये जरूर दोहराया कि नीतीश के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा जाएगा और चुनाव नीतीश के चेहरे पर ही लड़ा गया.

जेडीयू का सोशल मीडिया पोस्ट हुआ डिलीट: दूसरी चर्चा मतगणना शुरू होने के कुछ घंटों बाद तब शुरू हुई, जब जेडीयू के आधिकारिक X हैंडल से एक भावुक और दमदार पोस्ट आया. पोस्ट में लिखा था “न भूतो न भविष्यति… नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री थे, हैं और रहेंगे.” यह ट्वीट जैसे ही वायरल होने लगा, कुछ ही मिनटों में उसे डिलीट कर दिया गया. ऐसा क्यों हुआ, इस सवाल का जवाब जेडीयू की तरफ से नहीं आया, लेकिन इस बात की चर्चा जरूर होने लगी कि, बीजेपी के पक्ष में जो आंकड़ें है, ऐसे में क्या बिना नीतीश कुमार के क्या जेडीयू सरकार बना सकती है?.
परिणाम ने लिखी नई इबारत: पूरे चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष लगातार दावा कर रहा था कि 2025 नीतीश कुमार का अंतिम चुनाव है. उम्र और स्वास्थ्य के सवाल उठाए गए, लेकिन रुझानों ने सारी आलोचनाओं को गलत साबित कर दिया. जेडीयू ने अपने दम पर 75 से 80 सीटों की मजबूत स्थिति बना ली है और एनडीए के अंदर सबसे बड़े सहयोगी के रूप में अपनी स्थिति लगभग बरकरार रखी है.

बीजेपी बनी सबसे बड़ी पार्टी: सबसे चौंकाने वाला परिणाम बीजेपी का रहा. पार्टी 95 से 100 सीटों के आंकड़े की ओर बढ़ रही है और पहली बार बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है. इससे गठबंधन के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि चुनाव नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ा गया था, लेकिन संख्याबल अब बीजेपी के पास ज्यादा है. अभी तक एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री के नाम पर कोई औपचारिक सहमति नहीं बनी है.
भाजपा: 96
जदयू: 85
लोजपा (रा): 19
हम: 5
RLM: 4
चिराग पासवान का उम्दा प्रदर्शन: एनडीए खेमे में दूसरा सरप्राइज चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने दिया. महज 29 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी 21-23 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. यदि यही परिणाम रहा तो यह चिराग के लिए ऐतिहासिक वापसी होगी. इतनी सीटें आने पर चिराग उपमुख्यमंत्री पद की मांग रख सकते हैं.
वहीं, महागठबंधन महज 31 सीटों पर सिमटता दिख रहा है. राजद को 25 के आसपास और कांग्रेस को एकल अंक में सीटें मिलती दिख रही हैं.
डिलीट ट्वीट ने खोल दिया पर्दा: जदयू का वह कुछ मिनटों का ट्वीट भले डिलीट हो गया हो, लेकिन उसने साफ संकेत दे दिया कि पार्टी नीतीश कुमार के अलावा किसी और नाम को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार करने के मूड में नहीं है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भाजपा संख्याबल के बावजूद नीतीश कुमार के नाम पर मुहर लगाएगी या गठबंधन में नया समीकरण बनेगा.
बीजेपी के सीएम के लिए क्या है आंकड़े. अभी तक के आंकड़ों की बात करें तो बीजेपी चिराग पासवान और मांझी के साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं. अगर नीतीश कुमार उनके साथ नहीं भी रहते हैं तो भी बीजेपी अपने सहयोगियों के दम पर आराप से बहुमत का आंकड़ा 122 पा सकती है. दूसरी तरफ अगर नीतीश पाला बदल कर महागठबंधन की तरफ भी जाते हैं तो वह बहुमत से कम ही होगा. क्योंकि अभी तक के आंकड़ों के हिसाब से RJD- 25, कांग्रेस- 05, लेफ्ट- 2 ऐसे में इसकी भी गुंजाइश कम हो गई है.







