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दादा 2 बार बिहार के CM रहे फिर भी 4131 वोट, चौथे स्थान पर पहुंची भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की पोती

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दादा 2 बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे फिर भी 4131 वोट. कर्पूरी ठाकुर को जननायक कहने वाली जनता ने उनकी पोती को नकार दिया.

कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति

समस्तीपुर: दादा बिहार के दो बार सीएम और एक बार डिप्टी सीएम रहे चुके थे फिर भी पोती को बिहार चुनाव 2025 में सफलता नहीं मिली. हम बात कर रहे हैं समस्तीपुर के मोरवा विधानसभा क्षेत्र की, जहां से जनसुराज ने कर्पूरी ठाकुर को आदर्श मानकर उनकी पोती जागृति सिंह को चुनावी मैदान में उतारा था.

दो बार बिहार के सीएम रहें: 1970-79 तक कर्पूरी ठाकुर का चर्चा में थे. काम और त्याग की बदौलत ही उन्हें जननायक कहा गया. गरीब परिवार और नाई समाज से आने वाले कर्पूरी ठाकुर बिहार में 22 दिसंबर 1970 से 2 जून 1971 (सोशलिस्ट पार्टी) सीएम रहे. इसके बाद 24 जून 1977 से 21 अप्रैल 1979 (जनता पार्टी) तक सीएम रहे. इसके अलावे एक बार डिप्टी सीएम और एक बार विपक्ष के नेता भी रहे.

परिवार के साथ कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति

अति पिछड़ा वोट बैंक के हितैसी: 1978 में पिछड़ो को 26 प्रतिशत आरक्षण देकर सामाजिक न्याय की नीव रखी. हालांकि इस दौरान जनसंघ और आरएसएस ने जमकर इसका विरोध किया था, लेकिन आज वही बीजेपी, जदयू और राजद सभी इनके नाम पर अति पिछड़ा वोट बैंक इक्ट्ठा करते हैं. इसी राह पर जन सुराज के प्रशांत किशोर भी चले थे.

जनता ने नकारा: कर्पूरी ठाकुर 1952 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर सदन पहुंचे, इसके बाद कभी चुनाव नहीं हारे, लेकिन पहली बार चुनावी मैदान में पोती डॉ. जागृति सिंह चुनाव हार गयी. मोरवा विधानसभा सीट पर डॉ. जागृति दूसरे-तीसरे नहीं बल्कि चौथे नंबर पर चली गयीं. मात्र 4131 वोट मिले. कुल वोट के 2.1 % ही वोट पड़े. जिस कर्पूरी ठाकुर को जनता जननायक कहते थे, वही जनता ने उनकी पोती को नकार दिया.

10 में 7 पर NDA की जीत: बता दें कि जिले में 10 विधानसभा आते हैं. कल्याणपुर, वारिसनगर, समस्तीपुर, उजियारपुर, मोरवा, सरायरंजन, मोहिउद्दीनगर, विभूतिपुर, रोसड़ा और हसनपुर शामिल है. 10 सीटों में 7 पर एनडीए का कब्जा हुआ. पांच सीटों पर जदयू और दो सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार सफल हुए. तीन सीटों में महागठबंधन में 2 पर राजद और एक पर सीपीआई (एम) के प्रत्याशी ने जीत हासिल की.

मोरवा से रणविजय साहू(RJD) की जीत: मोरवा विधानसभा सीट कई मायनों में खास था. इस सीट से एनडीए, महागठबंधन के अलावे जन सुराज ने पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की पोती को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली. मोरवा से राजद के प्रत्याशी रणविजय साहू की जीत हुई. दूसरे नंबर पर जदयू के विद्या सागर सिंह निषाद रहे. कर्पूरी ठाकुर की पोती चौथे स्थान पर चली गयीं. तीसरे स्थान पर निर्दलीय प्रत्याशी अभय सिंह रहे.

कल्यानपुर से जदयू के महेश्वर हजारी विजेता: जिले के 10 विधानसभा सीट में कल्यानपुर से जदयू के महेश्वर हजारी 118162 वोट प्राप्त कर विजयी हुए. समस्तीपुर से जदयू की अश्वमेध देवी विजेता रहीं. इन्हें 95728 वोट मिले. वारिसनगर से जदयू के मंजरिक मृणाल 108968 वोट मिला. सरायरंजन से जदयू के विजय चौधरी को 102792 वोट मिले. महेश्वर हजारी इससे पहले दो बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं. दो बार सांसद और बिहार सरकार में कई विभागों के मंत्री रहे हैं.

“मुझे शुरू से ही लग रहा था कि कल्यानपुर के मतदाता हमारे साथ हैं. मैं यहां की जनता को धन्यवाद देता हूं. नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार ने जिस तरह से विकास के काम किए हैं, उसी का उदाहरण है कि कल्यानपुर की जनता ने जीत दिलायी है.” -महेश्वर हजारी, नव निर्वाचित विधायक, कल्यानपुर

उजियारपुर से राजद के आलोक मेहता विजेता: हसनपुर से जदयू के राज कुमार राय को 90961 वोट मिले. मोहिउद्दीनगर से बीजेपी के राजेश कुमार सिंह को 89208 वोट मिले. रोसड़ा से बीजेपी के बिरेंद्र कुमार को 122773 वोट मिले. उजियारपुर से राजद के आलोक मेहता को 102707 वोट मिले तो वहीं विभूतिपुर से सीपीआई एमएल के अजय कुमार को 79246 मिले और विजयी हुए. आलोक मेहता तीसरी बार उजियारपुर सीट से विजयी घोषित हुए हैं.

“उजियारपुर की जनता के बीच नतमस्तक हूं कि तीसरी बार उन्होंने मुझे मौका दिया. मैं जनता के प्रति आभार प्रकट करता हूं.” -आलोक मेहता, नव निर्वाचित विधायक, उजियारपुर

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