नालंदा में किसानों ने दुनिया का सबसे महंगा आम उगाया है। जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत में 3 iPhone आ जायेगा।
नालंदा: बिहार का नालंदा, यहां की धरती ज्ञान के लिए जानी जाती है। लेकिन, अब यहां किसान खेती में नए-नए चमत्कार कर रहे हैं। यहां के किसानों ने दुनिया का सबसे महंगा और खास जापानी आम का उत्पादन कर सभी को हैरान कर दिया है। वैश्विक बाजार में इसकी कीमत इतनी है कि एक किलो आम बेच दिए तो 3-3 आईफोन खरीदा जा सकता है।
दो गांवों के किसानों का कमाल: चंडी प्रखंड के ढकनिया और अस्थावां के गिलानी गांव के किसानों ने इस खास आम की खेती की है। नालंदा जिले में इस खास प्रजाति के 4 पेड़ हैं। इसमें एक पेड़ ढकनिया गांव के किसान चमन सिंह के पास है और दूसरा सबा आजम गिलानी के बगीचे में फल दे रहा है। बाकी दो पेड़ जिला बागवानी (हॉर्टिकल्चर) विभाग के कार्यालय में हैं।
हवाई जहाज से मंगवाया पौधा: किसान चमन सिंह पुरानी बातें याद कर कहते हैं कि उनके पिता सुरेंद्र सिंह को पेड़-पौधों से बहुत लगाव था। गांव और आसपास के लोग उन्हें ‘पर्यावरण विदुर’ के नाम से जानते थे. उन्होंने ही साल 2021 में सोशल मीडिया के माध्यम से इस आम के बारे में सुना था। उसी साल सुरेंद्र सिंह ने जापान से हवाई जहाज के माध्यम से आम के पेड़ मंगवाए थे।

शुरुआती खर्च और रखरखाव: दरअसल, यह आम जापान की खास किस्म मियाजाकी है। चमन सिंह बताते हैं कि जापान से मंगाए गए एक पौधे की कीमत करीब 1200 रुपये थी। मेरे पिता ने 6 पौधे मंगवाए थे, जिसमें पौधों को भारत लाने, कस्टम ड्यूटी समेत अन्य मिलाकर कुल 15000 रुपये खर्च हुए थे. जापान से पौधा आने के बाद पिताजी ने अपने पुश्तैनी बगीचे में वैज्ञानिक तरीके से लगाया था. हालांकि जिसमें मात्र एक पेड़ बचा बाकी सब सूख गए।
“6 पेड़ में मात्र एक पेड़ बचे थे। इस साल एक पेड़ में 21 फल लगे थे, जिनमें से अब 5 बचे हैं। पकने के बाद इसे तोड़ लिया गया है. एक आम का वजन 300 से 500 ग्राम तक होता है. एक पेड़ में 20 से 30 फल तक आ जाते हैं।” -चमन सिंह, किसान
बगीचे में दुर्लभ आमों का खजाना: चमन सिंह करीब एक से डेढ़ एकड़ में आम की खेती करते हैं. बगीचे में मियाजाकी के अलावा 80-85 अलग-अलग किस्मों के दुर्लभ आम के पेड़ हैं। इनमें देश-दुनिया के मशहूर आम जैसे नूरजहां, मल्लिका, ब्लैक मैंगो और ब्लैक स्टोन जैसी किस्में शामिल हैं। इन अनोखे आमों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. खासकर मियाजाकी पर सभी की नजर होती है।

आजम का बड़ा एक्सपोर्ट बिजनेस: मियाजाकी आम की महक अस्थावां के गिलानी गांव में भी फैली है. यहां के किसान मो. सबा आजम गिलानी पांच बीघा यानी लगभग 3 एकड़ में आम की खेती करते हैं। इनके बगीचे के आम सीधे विदेशों में सप्लाई किए जाते हैं। इन्होंने भी अपने बगीचे में मियाजाकी आम की खेती की है। उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद (दशहरी आम के लिए प्रसिद्ध) से 600 रुपये प्रति पेड़ के हिसाब से 4 पेड़ मंगवाए थे. मौसम के कारण 3 पौधे सूख गए. एक पेड़ बचा, जिसमें इस साल 4 फल आए हैं।
क्यों खास है यह आम?: नालंदा के नूरसराय हॉर्टिकल्चर कॉलेज की फ्रूट एक्सपर्ट डॉ. दिव्या तिवारी ने इस मियाजाकी आम की खासियत के बारे में बात की. उन्होंने बताया कि जापान के मियाजाकी शहर में ‘इरविन’ प्रजाति से इस आम को तैयार किया गया है। अनोखी बनावट और सुर्ख लाल रंग के कारण जापान में इसे ‘सूर्य का अंडा’ (Taiyo-no-Tamago) कहा जाता है।
मियाजाकी आम का इतिहास: डॉ. दिव्या तिवारी के अनुसार जापान के मियाजाकी शहर में इस बेशकीमती आम की पैदावार 1970 में पहली बार हुई थी। अपने बेहतरीन स्वाद, मखमली बनावट और रूबी जैसे चटक लाल रंग के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इसकी खेती के लिए खास मौसम, भरपूर धूप और नमी का नियंत्रण बहुत जरूरी है. इसके अलावा बारिश भी अच्छी होनी चाहिए।

जालीदार बैग में बंद रहता है फल: फ्रूट एक्सपर्ट के अनुसार जापान में अमूमन 30 डिग्री सेल्सियस तक तापमान रहता है। तापमान को देखते हुए पेड़ में ही फल को एक जालीदार कपड़े या बैग से ढक दिया जाता है। इससे सूर्य की रोशनी फल पर बराबर पड़ती है और जब आम पक जाए तो नीचे गिरने से बच जाता है। क्योंकि यह बहुत ही कोमल फल होता है। अगर जमीन पर गिरा तो खराब हो जाएगा. सूर्य की रोशनी के कारण ही इसका रंग सुर्ख लाल हो जाता है।
“इसकी गुठली बहुत पतली होती है और इसमें फाइबर नहीं होता. यह अल्फांसो आम से मिलता-जुलता है। इसमें एसिडिक ब्लेंड होता है जो विदेशियों को काफी पसंद आता है और मिठास भी संतुलित होती है.” -डॉ. दिव्या तिवारी, फ्रूट एक्सपर्ट

गंभीर बीमारियों में दवा का काम: डॉ. दिव्या तिवारी के मुताबिक, इस खास प्रजाति के आम में एंटीऑक्सीडेंट, बीटा-कैरोटीन, फोलिक एसिड, जिंक, कैल्शियम, कॉपर, मैग्नीशियम के अलावा विटामिन C, E, A, और K भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यही कारण है कि मियाजाकी आम सेहत के लिहाज से कई गंभीर बीमारियों में रामबाण है।
कैंसर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल: डॉ. दिव्या तिवारी कहती हैं कि मेडिकल रिसर्च और एक्सपर्ट्स की मानें तो यह आम कैंसर के खतरे को कम करने में मददगार है। इसके साथ-साथ दिल से जुड़ी बीमारियों में सहायक है। शरीर में बढ़ते कोलेस्ट्रॉल को जल्दी कम करने में मदद करता है। खून में इंसुलिन के लेवल को भी नियंत्रित करने में सहायक है. इसे खाने से शुगर कंट्रोल रहता है।

पेट की पुरानी समस्या में फायदेमंद: पेट की समस्या में यह आम फायदेमंद है. लंबे समय से कब्ज, गैस या अपच की समस्या है तो इस आम को खाना चाहिए. इससे यह समस्या खत्म होती है. इस आम में पाए जाने वाले पाचक एंजाइम्स और जरूरी विटामिंस पेट के सिस्टम को बेहतर बनाते हैं. शरीर की इम्यूनिटी क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करते हैं।
भारत में पहली खेती कहां हुई?: डॉ. दिव्या तिवारी बताती हैं कि भारत में इसकी पहली खेती का कोई समय निर्धारित नहीं है. हालांकि पहली बार इसे तमिलनाडु के उडुपी जिले में उगाया गया था. इसके बाद देश के अलग-अलग राज्यों में इसकी खेती होने लगी. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में इस आम की खेती बड़े पैमाने पर होती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत: फ्रूट एक्सपर्ट के अनुसार मियाजाकी आम दुनिया का सबसे महंगा आम ऐसे ही नहीं कहलाता है। वैश्विक बाजार में इस आम की कीमत ₹2.5 लाख से लेकर ₹3 लाख प्रति किलो के आसपास होती है।बंगाल के मुर्शिदाबाद में इस आम की कीमत 1500 रुपये प्रति पीस होती है। बिहार में अभी इस आम की पैदावार अधिक नहीं है, इसलिए इसको लेकर कोई बाजार या खरीदार नहीं है।





